परिचय पाकिस्तान में अहमदिया मुस्लिम समुदाय ने देश में धार्मिक स्वतंत्रता के संवैधानिक आश्वासन के बावजूद कुछ समय तक उत्पीड़न और पक्षपात सहा है। हाल ही में स्थिति और भी खराब हो गई है, तहरीक-ए-लबैक (टीएलपी) जैसे चरमपंथी गुटों ने अहमदियों के प्रति दुश्मनी और आक्रामकता को बढ़ावा दिया है। उत्पीड़न इस हद तक पहुँच गया है कि कई अहमदियों को अपने परिवारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और अपने धर्म का स्वतंत्र रूप से पालन करने के लिए पाकिस्तान से भागने के लिए मजबूर होना पड़ा है। अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार समिति (IHRC) और Coordinate des Association et des Particulier pour la Liberté de Conscience (CAP-LC) जैसे संगठन सक्रिय रूप से जागरूकता बढ़ा रहे हैं और अहमदिया मुस्लिम समुदाय के अधिकारों की वकालत कर रहे हैं।
हाल के वर्षों में, पाकिस्तान को धार्मिक स्वतंत्रता, विशेषकर अहमदिया समुदाय के संबंध में कई चुनौतियों से जूझना पड़ा है। धार्मिक विश्वासों की स्वतंत्र अभिव्यक्ति के अधिकार का बचाव करने वाले पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले के बाद यह मुद्दा एक बार फिर से सामने आ गया है।